मुख्य पेज   |    संर्पक    |   मिडीया      |    English
ॐ नम: शिवाय      ॐ नम:शिवाय     ॐ नम: शिवाय      ॐ नम:शिवाय     ॐ नम: शिवाय
ॐ नम: शिवाय
 
 
 
 
 
 
श्री शिवयोगी रघुवंश पुरी जी
   
 

शिव के 108 नाम

पिनाकी
भक्तवत्सल भगवान सम्पूर्ण जीवों की रक्षा के लिए अपने हाथ में धनुष धारण करते हैं। उस धनुष का नाम है पिनाक। पिनाक को धारण करने के कारण शिव को पिनाकी कहा जाता है।
इस पिनाक की भी बड़ी विचित्र कथा है। एक समय, घोर कानन के अंदर, कण्व मुनि कठोर तपस्या कर रहे थे। तपस्या करते–करते, समाधिस्थ होने के कारण उन्हें भान हीं नहीं रहा कि सारा शरीर दीमक के द्वारा बाँबी बना दिया गया। उस मिट्टी के ढे़र पर हीं एक सुन्दर बाँस उग आया। तपस्या जब पूर्ण हुई तब ब्रह्मा जी प्रकट हुए। उन्होने अपने अमोघ जल के द्वारा कण्व की काया को कुन्दन बना दिया। उन्हें अनेक वरदान दिये और जब जाने लगे तो ध्यान आया कि कण्व की मूर्धा पर उगी हुई बाँस कोई सामान्य नहीं हो सकती। इसका सदुपयोग करना चाहिए। उसे काट कर ब्रह्मा जी ने विश्वकर्मा को दे दिया और विश्वकर्मा ने उससे तीन धनुष बनाया–पिनाक, शागर्ङ, गाण्डीव। और इन तीनों धनुषों को ब्रह्मा जी ने भगवान शंकर को समर्पित कर दिया। भगवान शंकर ने हीं विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें शागर्ङ धनुष दे दिया। कृष्ण से प्रेरित अजु‍र्न की तपस्या से मुदित हो महेश्वर ने गाण्डीव दे दिया और पिनाक अपने पास हीं रख लिया। पिनाक को पिनाक इसीलिए कहते हैं कि इसके बाणों ने नाक यानी स्वर्ग को भी पिहित यानी ढ़क दिया। यह पिनाक सर्पाकार और सात फनों वाला है। जिसे जगत् के हित के लिए शंकर अपने कर में सुशेभित करते हैं। भास्कर राय भी इसी अर्थ का समर्थन करते हैं–
नाकोSपि येन पिहितो मुनिकण्वमूर्धवल्मीकवेणुजधनुस्त्रितयाग्रजन्मा।
य: सप्तशीर्षफणिरूप उदारकर्मा चापस्तमावहसि नाथ! तत: पिनाकी।।

अध्यात्म में तो प्रणव ही धनुष है जिससे पिनाकी पकड़ में आ जाते हैं।


 
------------------------------------------------------
 
 
 
 
 
  कार्यक्रम
 
  शिव कथा
    मकर संक्राति
    शिव नाम प्रवचन
    महा शिव रात्रि
READ MORE
 


 

संर्पक

श्री वेदनाथ महादेव मंदिर
एफ / आर - 4 फेस – 1,
अशोक विहार, दिल्ली – 110052
दूरभाष : 09312473725, 09873702316,
011-47091354


 


  प्रवचन
 
    प्रवचन 1
    प्रवचन 2
    प्रवचन 3
  प्रवचन 4
 

 

 India Tour Package Data Entry Service
Designed and Maintained by Multi Design